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नन्हे भीम की मीठी लड्डू पार्टी

नन्हे भीम की मीठी लड्डू पार्टी

बहुत पुरानी बात है। हस्तिनापुर नाम के एक बहुत ही सुंदर महल में नन्हा भीम रहता था। महल के चारों तरफ बड़े-बड़े हरे पेड़ थे और सुंदर रंग-बिरंगे फूल खिले रहते थे। एक दिन सुबह-सुबह, जब सुनहरा सूरज आसमान में चमक रहा था, महल की बड़ी सी रसोई से एक बहुत ही मीठी खुशबू आने लगी।

अरे वाह, यह तो ताजे, गरम और मीठे लड्डुओं की खुशबू थी। नन्हे भीम को लड्डू बहुत ज्यादा पसंद थे। उसे रसोई से एक बड़ी सी टोकरी मिली जो सुनहरे और गोल-गोल लड्डुओं से बिल्कुल भरी हुई थी। भीम बहुत खुश हुआ। उसने सोचा कि वह दूर बगीचे में जाएगा और अकेले ही शांति से बैठकर सारे लड्डू खाएगा। वह खुशी-खुशी अपनी टोकरी लेकर एक बहुत बड़े आम के पेड़ के नीचे जाकर बैठ गया।

वहां पेड़ के पत्तों की मीठी-मीठी सरसराहट हो रही थी और ठंडी हवा चल रही थी। भीम ने जैसे ही पहला लड्डू खाने के लिए अपना मुंह खोला, तभी अचानक, वहां एक छोटी सी प्यारी गिलहरी आ गई। उसकी पूंछ बहुत ही रोएंदार थी और उसकी आंखें चमक रही थीं। गिलहरी ने भीम के मीठे लड्डुओं को देखा। वह बहुत भूखी लग रही थी। भीम ने अपने हाथ में पकड़े लड्डू की तरफ देखा और फिर उस छोटी सी गिलहरी की तरफ देखा। उसे लगा कि शायद गिलहरी को भी लड्डू खाने का मन कर रहा है।

और क्या आप जानते हैं कि फिर क्या हुआ?

नन्हे भीम का दिल बहुत बड़ा और प्यारा था। उसने सोचा, अगर मैं अकेले ही सारे लड्डू खा लूंगा, तो यह छोटी गिलहरी बेचारी भूखी रह जाएगी। भीम ने एक प्यारी सी मुस्कान के साथ अपना एक बड़ा सा लड्डू उस गिलहरी की तरफ बढ़ा दिया। गिलहरी ने अपने छोटे-छोटे हाथों से लड्डू पकड़ा और खुशी से ची-ची करके उसे खाने लगी।

थोड़ी ही देर में, मीठी खुशबू सूंघकर वहां कुछ नीली चिड़ियां और एक नन्हा भूरा हिरण भी आ गए। भीम ने बिल्कुल भी कंजूसी नहीं की और न ही वह परेशान हुआ। उसने अपनी टोकरी से और भी लड्डू निकाले और अपने सभी नए जंगल के दोस्तों में बांट दिए। सब एक साथ मिलकर मीठे-मीठे लड्डू खाने लगे।

लड्डू खत्म होने के बाद भीम और उसके दोस्त मुलायम हरी घास पर खूब खेले। किसी ने दौड़ लगाई, तो किसी ने छलांग मारी। भीम जोर-जोर से हंस रहा था। उसे आज बहुत अच्छा लग रहा था। उसने समझ लिया था कि अकेले मीठी चीजें खाने में उतना मजा नहीं है, जितना सबके साथ प्यार से बांटकर खाने में है।

प्यारे बच्चों, जब हम अपनी चीजें अपने दोस्तों के साथ बांटते हैं, तो हमारी खुशी एकदम दोगुनी हो जाती है। इसलिए हमेशा नन्हे भीम की तरह दयालु बनें और सबके साथ मिलकर रहें।

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