
विहान को नई चीज़ों की खोज करना और रहस्य सुलझाना बहुत पसंद था। एक दिन, सर्दियों की छुट्टियों में, वह और उसकी सात साल की छोटी बहन अनन्या अपने पुश्तैनी घर के बड़े से 'अंगना' में खेल रहे थे। रात का समय था, आसमान में आधा चाँद चमक रहा था, और सर्द हवा के कारण पेड़ों के पत्ते सर-सर कर रहे थे।
आँगन के एक अंधेरे कोने में दादाजी की एक बहुत पुरानी, विशाल लकड़ी की घड़ी रखी थी। आज की रात बहुत खास थी, क्योंकि कुछ ही देर में नया साल शुरू होने वाला था। विहान ने अपनी टॉर्च जलाई और घड़ी की तरफ देखा—रात के 11:45 बज चुके थे।
अचानक, उस शांत रात में एक गहरी और डरावनी आवाज़ गूंजी...
(बच्चों, क्या आप भी विहान की तरह डरे होते? चलो साथ में आवाज़ निकालते हैं!)
डोंग... डोंग... डोंग...
घड़ी ने ज़ोर से आवाज़ की, लेकिन समय तो अभी 12 नहीं बजा था! यह क्या हो रहा था? तभी, घड़ी के निचले हिस्से से एक और अजीब सी आवाज़ आने लगी—
सरर-सरर... खट-खट... सरर-सरर...
अनन्या बुरी तरह डर गई और भागकर विहान के पीछे छिप गई। "भैया, क्या अंदर कोई भूत है? मुझे बहुत डर लग रहा है," उसने कांपते हुए कहा।

विहान का दिल धड़क-धड़क कर रहा था। हिम्मत करके उसने अपनी बहन का हाथ पकड़ा और कहा, "डर मत अनन्या, दादाजी के घर में भूत नहीं हो सकते। हम मिलकर देखेंगे कि यह क्या है।"
(क्या आपको लगता है वो सही कर रहे हैं? हाँ, बहादुरी इसी में है!)
दोनों धीरे-धीरे उस विशाल, पुरानी घड़ी के पास गए। पुरानी लकड़ी से हल्की-हल्की चंदन की महक आ रही थी। विहान ने टॉर्च की रोशनी घड़ी के शीशे पर डाली। पास जाकर देखा तो... अंदर कोई भूत नहीं था!
घड़ी के भारी पेंडुलम के पीछे एक छोटा सा, सुंदर सा जादुई उल्लू फंसा हुआ था, जो बाहर निकलने के लिए अपने पंख फड़फड़ा रहा था। उसी के पंखों के टकराने की आवाज़ सरर-सरर आ रही थी। विहान ने मुस्कुराते हुए सावधानी से घड़ी का छोटा दरवाज़ा खोला। वह उल्लू खुशी से हूट-हूट करता हुआ बाहर निकला और आसमान में उड़ गया।
लेकिन कहानी यहाँ खत्म नहीं हुई! जैसे ही उल्लू बाहर निकला, उसके पंजों से एक पुराना, मुड़ा हुआ कागज़ नीचे गिर पड़ा।
अब उनके सामने यह पहेली थी। कागज़ पर संस्कृत के श्लोक के नीचे हिंदी में एक संदेश लिखा था: "नया साल शुरू होने से पहले इस पहेली को सुलझाओ, वरना यह घड़ी हमेशा के लिए रुक जाएगी।"
समय का बहुत दबाव था! घड़ी में 11:58 हो चुके थे। विहान ने ज़ोर से पहेली पढ़ी:
"मैं सबका राजा, पर सिंहासन नहीं।
मैं कभी नहीं रुकता, न ही कभी पीछे जाता हूँ।
मेरे बिना सब ठहर जाए, मैं सबको आगे बढ़ाता हूँ।
बताओ मैं क्या हूँ?"
(इस पहेली का जवाब जल्दी बताओ! क्या आप विहान और अनन्या की मदद कर सकते हो?)
अनन्या ने अपना दिमाग दौड़ाया और बोली, "भैया, क्या यह हवा है? वह भी नहीं रुकती!"
विहान ने सिर हिलाया, "नहीं अनन्या... रुको! यह घड़ी हमें क्या बताती है? यह पहेली उसी के बारे में है! इसका जवाब 'समय' (Time) है!"
जैसे ही विहान ने ज़ोर से "समय!" कहा, घड़ी के अंदर से एक तेज़ झन-झन-झन की जादुई आवाज़ आई। घड़ी की सुइयां तेज़ी से घूमीं और ठीक 12 पर जाकर रुक गईं।
डोंग... डोंग... डोंग... (12 बार बजने की आवाज़ आई)
तभी, चमत्कार हुआ। घड़ी के नीचे लकड़ी का एक छोटा सा गुप्त दराज क्लिक की आवाज़ के साथ खुला। अंदर लाल मखमली कपड़े पर दादाजी की एक छोटी सी, सुनहरी जेब-घड़ी (Pocket Watch) रखी थी। वह हल्की नीली रोशनी से चमक रही थी।
विहान ने उसे उठाया। उस पर एक खास बटन था। जैसे ही उसने वह बटन दबाया...
(सब बच्चे चुप रहें और 5 सेकंड तक बिल्कुल हिलें नहीं!)
...पूरी दुनिया थम गई! दूर आसमान में फूट रहे पटाखे हवा में ही ठहर गए, हवा का चलना रुक गया, और अनन्या का हाथ हवा में स्थिर हो गया। सब कुछ 5 सेकंड के लिए रुक गया था।
ठीक 5 सेकंड बाद, टिक की आवाज़ हुई और सब फिर से सामान्य हो गया।
और इस तरह, दोनों भाई-बहन को पता चल गया कि दादाजी ने उनके लिए एक जादुई तोहफा छोड़ा था—एक ऐसी घड़ी जो 5 सेकंड के लिए समय को रोक सकती थी। उन्होंने टीमवर्क से न सिर्फ रहस्य सुलझाया, बल्कि उन्हें ज़िन्दगी का सबसे अनोखा इनाम भी मिला।